
जिला जांजगीर-चांपा।जिले के थाना मुलमुला क्षेत्र अंतर्गत ग्राम मुरलीडीह से सामने आए एक गंभीर मामले ने कानून व्यवस्था, ग्रामीण राजनीति और पुलिस प्रशासन की निष्पक्षता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। जमीन विवाद को लेकर एक दंपती के साथ कथित रूप से की गई बर्बर मारपीट, आठ दिन तक अस्पताल में इलाज और उसके बाद भी FIR दर्ज न होने के आरोप ने पूरे मामले को संवेदनशील बना दिया है। पीड़ित परिवार ने गांव की महिला सरपंच, VDC सदस्य समेत सात लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं थाना मुलमुला प्रभारी पर रिपोर्ट दर्ज नहीं करने और धमकाने के भी आरोप लगाए गए हैं।

जमीन विवाद बना हिंसा की वजह
पीड़िता शीला देवी राय ने आरोप लगाया है कि उनके पति वेदप्रकाश राय जो एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं अपने पैतृक जमीन पर मिट्टी पटाई का कार्य करा रहे थे। इसी दौरान गांव की सरपंच राजकुमारी पाटले VDC कमलेश पाटले और उनके सहयोगियों ने वहां पहुंचकर पुराना न्यायालयीन मामला वापस लेने और जमीन खाली करने का दबाव बनाया। विरोध करने पर कथित रूप से लाठी-डंडों और हाथ-मुक्कों से बेरहमी से हमला किया गया।
आरोप है कि मारपीट इतनी गंभीर थी कि वेदप्रकाश मौके पर ही बेहोश होकर गिर पड़े। पति को बचाने पहुंची शीला देवी के साथ भी कथित रूप से मारपीट की गई और उनके सिर पर लाठी से हमला किया गया। घटना के बाद दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए।
आठ दिन अस्पताल में भर्ती फिर भी कार्रवाई नहीं
घटना के बाद घायलों को 112 और 108 की सहायता से अस्पताल पहुंचाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद दोनों को सिम्स बिलासपुर रेफर किया गया जहां कई दिनों तक इलाज चला। मेडिकल दस्तावेजों के अनुसार पीड़िता को झटके आने की शिकायत भी रही। गंभीर हालत और लगातार भय के कारण परिवार को गांव छोड़कर अकलतरा क्षेत्र में शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा।
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब मेडिकल दस्तावेज और उपचार के प्रमाण मौजूद हैं तब भी पुलिस द्वारा तत्काल FIR दर्ज क्यों नहीं की गई यदि पीड़ित पक्ष के आरोप सही हैं तो यह केवल एक मारपीट का मामला नहीं बल्कि कानून व्यवस्था और पीड़ित अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय बन जाता है।
थाना प्रभारी पर गंभीर आरोप
पीड़िता ने थाना मुलमुला प्रभारी पारस पटेल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जब वह शिकायत लेकर थाने पहुंचीं तो उन्हें यह कहकर वापस लौटा दिया गया कि इतने दिन बाद रिपोर्ट नहीं लिखी जाएगी। पीड़िता ने दावा किया है कि थाना प्रभारी के साथ हुई बातचीत का वीडियो भी उनके पास मौजूद है जिसे मीडिया को सौंपा गया है।

यदि वास्तव में ऐसा वीडियो मौजूद है तो यह मामला केवल स्थानीय विवाद तक सीमित नहीं रहता बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली और संवेदनशीलता पर भी प्रश्नचिन्ह लगा देता है। आम नागरिक जब न्याय की उम्मीद लेकर थाने पहुंचता है और वहां से निराश होकर लौटता है, तो जनता का विश्वास कानून व्यवस्था से कमजोर होता है।
जनप्रतिनिधियों पर कार्रवाई से बच रही पुलिस
मामले में जिन लोगों पर आरोप लगाए गए हैं, उनमें गांव की सरपंच और VDC सदस्य भी शामिल हैं। ऐसे में स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या पुलिस
जनप्रतिनिधियों पर कार्रवाई करने से बच रही है पीड़ित परिवार का आरोप है कि उनके खिलाफ ही उल्टा क्रॉस केस दर्ज कर दिया गया, जबकि उनकी शिकायत पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
यह स्थिति कई सवाल खड़े करती है
क्या प्रभावशाली लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने में पुलिस दबाव महसूस कर रही है
क्या ग्रामीण क्षेत्रों में आम नागरिकों को न्याय पाने के लिए अब वीडियो और मीडिया का सहारा लेना पड़ेगा?
क्या पीड़ित परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी प्रशासन नहीं बनती
निष्पक्ष जांच की आवश्यकता
मामले की गंभीरता को देखते हुए आवश्यक है कि पुलिस अधीक्षक और उच्च प्रशासनिक अधिकारी पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराएं। यदि थाना स्तर पर लापरवाही हुई है, तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही पीड़ित परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित कर आरोपियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन विवाद अक्सर हिंसक रूप ले लेते हैं लेकिन जब पीड़ित पक्ष को न्याय के बजाय भय और उपेक्षा का सामना करना पड़े, तब यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय बन जाता है। अब सभी की नजर प्रशासन पर टिकी है कि वह इस मामले में निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ क्या कदम उठाता है।
इस घटना की जानकारी चाही गई तो थाना मुलमुला प्रभारी पारस पटेल फोन रिसीव नहीं किया
इससे पता लगाया जा सकता कि कितनी संवेदनशील है महिला पर हुए मारपीट घटना जो पूरा जिला जांजगीर चांपा सुर्ख़ियों में इस घटना लगातार खबर प्रकाशन के अभी तक कोई घटना पर एफ आई आर नहीं हुआ है












