
बालको पावर प्लांट द्वारा केशला नदी डेंगुरनाला में केमिकल युक्त दूषित पानी छोड़े जाने और स्थानीय पर्यावरण व स्वास्थ्य के साथ हो रहे खिलवाड़ के विरोध में बुधवार को छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना ने उग्र आंदोलन किया। संगठन के नेतृत्व में किए गए चक्का जाम और जनआंदोलन को स्थानीय ग्रामीणों, युवाओं और महिलाओं का व्यापक समर्थन मिला। प्रशासन के हस्तक्षेप और आगामी 7 दिनों के भीतर त्रिपक्षीय वार्ता के आश्वासन के बाद आंदोलन समाप्त हुआ।

संगठन ने दूषित पानी और रोजगार की उपेक्षा का आरोप लगाया है l छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के जिला सह सचिव बसंत दास महंत की अगुवाई और जिला संयोजक अतुल दास महंत की उपस्थिति में आयोजित इस आंदोलन में प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। संगठन के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि बालको पावर प्लांट द्वारा लगातार नदी में प्रदूषित पानी छोड़ा जा रहा है। इससे न सिर्फ ग्रामीण दूषित पानी पीने को मजबूर हैं,बल्कि मवेशियों की जान पर भी खतरा मंडरा रहा है। इसके अलावा क्षेत्र में स्थानीय युवाओं को रोजगार न देकर उनकी मूलभूत सुविधाओं की लगातार उपेक्षा की जा रही है।
संगठन की प्रमुख मांगें है
की दोषियों के खिलाफ कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाए।प्रभावित क्षेत्र की विस्तृत पर्यावरण जांच हो।स्थानीय नागरिकों के लिए तत्काल स्वास्थ्य परीक्षण शिविर और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था की जाए।
स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता दी जाए।

आंदोलन के दौरान मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थिति को संभाला और छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना को आश्वस्त किया कि आगामी 7 दिनों के भीतर प्रशासन, बालको प्रबंधन और छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के बीच एक त्रिपक्षीय वार्ता आयोजित की जाएगी जिसमें सभी समस्याओं का समाधान निकाला जाएगा।
छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के पदाधिकारियों ने दोटूक शब्दों में कहा है कि यदि दिए गए आश्वासन के तहत तय समय सीमा में जायज मांगों पर उचित और ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो आने वाले दिनों में इससे भी अधिक उग्र आंदोलन किया जाएगा जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और बालको प्रबंधन की होगी।इस आंदोलन में छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के जिला व ब्लॉक स्तर के समस्त पदाधिकारी, भारी संख्या में ग्रामीण, माताएं-बहनें और स्थानीय युवा साथी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।












