गुरुद्वारा में आयोजित पूजन एवम भव्य लंगर(भंडारा) में शामिल हुए सर्व समाज के लोग
गुरुनानक जयंती को प्रकाश पर्व के रूप में मनाना धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आस्था का प्रतीक… अधिवक्ता चितरंजय पटेल
जैजैपुर/बेलादुला: गुरुनानक जयंती अर्थात प्रकाश पर्व अध्यात्मिक दर्शन का विषय है क्योंकि सिक्ख धर्म के संस्थापक और सिक्खों के प्रथम गुरु नानक के जन्म दिवस को प्रकाश पर्व के रूप में मनाना धार्मिक,आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आस्था का प्रतीक है, यह बात बताते हुए उच्च न्यायालय

अधिवक्ता चितरंजय पटेल ने आज प्रकाश पर कहा कि गुरुनानक देव जाति_ पंथ,भेदभाव से दूर समता मूलक समाज की कल्पना के साथ सामाजिक एकता व समरसता के भाव से लोगों के बीच, एक ईश्वर के ज्ञान का प्रकाश अनवरत देश के साथ विदेशों में भी फैलाते रहे परिणाम स्वरूप आज देश_विदेश में उनके अनुवाई भारी संख्या में सिक्ख धर्म के उपासक के रूप में उनके बताए बातों को गुरु वाणी के रूप में स्वीकार कर जीवन में आत्मसात कर रहे हैं।
आज नगर में सर्व समाज के लोगों ने सिक्ख एवम सिंधी समाज के द्वारा आयोजित प्रकाश पर्व में शामिल होकर उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दिया। पश्चात सबने गुरु ग्रंथ साहिब के सामने मत्था टेक पूजन कर भव्य लंगर (भंडारा) में प्रसाद ग्रहण किया।
आज गुरुनानक जयंती समारोह में नगर एवम आसपास प्रमुख सामाजिक एवम राजनीतिक हस्तियां मौजूद रही। हरजीत सिंह, सुनील दरयानी तथा सुरेश कृपलानी ने बताया कि आचार संहिता लागू रहने से प्रशासन के निर्देश पर इस साल समारोह को सीमित रूप में मनाने का प्रयास किया गया है फिर भी नगर के सभी समाज के लोग पहुंचकर भाई चारा के साथ गुरुनानक साहिब के प्रति आस्था का परिचय दिए जिसके लिए हम सभी लोगों के प्रति साधुवाद व्यक्त करते हैं। अंत में शाम नगर के प्रमुख मार्गों में समाज के द्वारा गुरुनानक जी भव्य झांकी शोभा यात्रा निकाली गई जिसमें गुरुवाणी शबद कीर्तन के साथ समाज की पुरुष महिलाएं उदघोष करते नजर आए।











