
मातृ_ पितृ सम्मान से ही हासिल होगी सुख समृद्धि …
अधिवक्ता चितरंजय
दुनिया भर में सभी माता-पिता के द्वारा बच्चों के प्रति समर्पण के साथ निस्वार्थ उनका पालन-पोषण किया जाता है और उनके इसी निस्वार्थ समर्पण के प्रति सम्मान प्रगट करने के साथ ही उनके प्रति आभार व्यक्त करना हम सबका नैतिक दायित्व है और इसी दायित्व बोध को आत्मसात करते हुए संयुक्त राष्ट्र (UN) ने १९९३ में एक प्रस्ताव पारित कर हर साल १ जून को विश्व मातृ-पितृ दिवस (Global Day of Parents) के रूप में घोषित किया था। इसी परंपरा के अनुसरण पूरी दुनिया आज अलग-अलग तरीकों से अपने मां-बाप के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं तथा उनका सम्मान कर आशीर्वाद ग्रहण करते हैं।
वर्तमान परिवेश इस मातृ पितृ दिवस के औचित्य पर ही प्रश्न चिन्ह लग रहा है, क्योंकि आज भारतीय परिवारों में नई पीढ़ी के साथ अपने बुजुर्गों तथा माता- पिता से जिस प्रकार से दूरियां बढ़ रही हैं तथा आज का युवा विवाह पश्चात ही अपने मां-बाप से अलग जीवन व्यतीत करना अपना स्टेटस सिंबल मानने लगा है या फिर मां-बाप को ही घर से अलग- थलग वृद्धाश्रमों की दहलीज में छोड़ आता है।
समाज की यह दुखद विडंबना ही बिखरते भारतीय परिवारों के लिए सबब है कि हम केवल मातृ -पितृ दिवस पर ही गले में हार या उपहार भेंट कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री के साथ सोशल मीडिया में फोटो पोस्ट कर क्षणिक चर्चा का विषय बन सकते हैं। परंतु सच्चाई यह है कि हम अपने बुजुर्गों के साथ जो व्यवहार करते हैं वही बुढ़ापे में हमारे अपने औलादों से वापस मिलता है। इसलिए मातृ पितृ दिवस के नाम पर सिर्फ ढोंग और आडंबर हमें भीतर से खोखला और सामाजिक एवं पारिवारिक व्यवस्था को कमजोर कर रहा है। इसलिए आज मातृ-पितृ हम सबको यह संकल्प लेने का वक्त है कि वृद्धाश्रम व्यवस्था व्यवस्था से परे अपने परिवार और घर में ही मां बाप के समुचित देखभाल के साथ ससम्मान गुजर बसर की व्यवस्था हो।
हम भारतीय संस्कृति एवं परंपरा को अनुसरण करने वाले भली-भांति जानते हैं कि जननी जन्मभूमि स्वर्गादपि गरीयसी अर्थात माता और मातृभूमि स्वर्ग से भी श्रेष्ठ है फिर घर को स्वर्ग बनाना ही तो मां-बाप की खुशी ही सब कुछ है। निश्चित रूप से मां का दुलार और पिता का साया हम कितने बड़े भी हो जाए, हमें शुकून और शांति देता है। फिर बच्चों को संस्कार दादा_दादी के गोद में ही मिलता है।
अंत में मातृ पितृ दिवस पर सभी को हार्दिक बधाई एवं मंगल कामनाएं कि हम भारतीय संस्कृति के मान्यताओं एवं परंपराओं को भलीभांति अनुकरण करें ताकि वसुधैव कुटुंबकम् का भाव जिंदा रहे और सभी सुखी और समृद्ध हों।
भारत माता की जय…वन्देमातरम











