
जांजगीर चांपा। खोखरा क्षेत्र के डॉ. पवन चतुर्वेदी को उनके निरंतर आध्यात्मिक, साहित्यिक एवं सामाजिक योगदान के लिए ऋषि वैदिक विद्या पीठ, फतेहपुर (आगरा) द्वारा मानद पीएचडी (डॉक्टरेट) की उपाधि से सम्मानित किया गया। यह सम्मान शिवरीनारायण के पीठाधीश महंत रामसुंदर दास के करकमलों से प्रदान किया गया, जो इस समारोह का विशेष आकर्षण रहा।
डॉ. पवन चतुर्वेदी लंबे समय से भागवत कथा के माध्यम से समाज में धर्म और संस्कृति की अलख जगा रहे हैं। उनकी कथावाचन शैली में गहराई, भावनात्मक जुड़ाव और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है।
उनके प्रवचन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होते हैं, बल्कि वे सामाजिक जागरूकता और नैतिक मूल्यों का संदेश भी देते हैं।
इसके साथ ही डॉ. चतुर्वेदी ने भागवत भक्ति गीतों की रचना कर भक्ति संगीत के क्षेत्र में भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। उनके द्वारा रचित गीतों में भक्ति, भाव और रस का अद्भुत संगम होता है, जो श्रोताओं को आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति कराता है।
समाज सेवा के क्षेत्र में भी उनका योगदान सराहनीय रहा है। वे समय-समय पर धार्मिक आयोजनों, सत्संगों और जनहित के कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को जोड़ते रहे हैं। उनके इन निरंतर प्रयासों और समाज के प्रति समर्पण को देखते हुए ऋषि वैदिक विद्या पीठ ने उन्हें इस प्रतिष्ठित उपाधि से सम्मानित किया।
इस अवसर पर महंत रामसुंदर दास ने अपने उद्बोधन में कहा कि डॉ. पवन चतुर्वेदी की वाणी में अद्भुत प्रभाव है। व्यासपीठ से उनका हर उच्चारण श्रोताओं के मन को छू लेता है और उन्हें भक्ति के मार्ग पर प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि ऐसे विद्वान समाज की अमूल्य धरोहर होते हैं।
इस सम्मान की खबर से पूरे क्षेत्र में खुशी और गर्व का वातावरण है। प्रबुद्धजन, श्रद्धालु एवं उनके शुभचिंतकों ने डॉ. पवन चतुर्वेदी को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस अवसर पर निर्मल दास वैष्णव सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे, जिन्होंने इस गरिमामय पल को और भी विशेष बना दिया।











