
सक्ती जिले के चिस्दा से एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसने आश्रम की व्यवस्थाओं और जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में बाल्टियों में पानी भरकर दूर से पानी लाती नजर आ रही हैं।
बच्चियों के हाथों में किताब-कॉपी की जगह पानी से भरी बाल्टियां दिखाई दे रही हैं। सवाल यह है कि आखिर को पानी ढोने के लिए क्यों मजबूर होना पड़ रहा है? क्या पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, या फिर व्यवस्था होने के बावजूद बच्चियों से यह काम कराया जा रहा है?
वीडियो सामने आने के बाद अधीक्षिका की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। बच्चियों से भारी वजन उठवाने को लेकर भी कई तरह की चिंताएं सामने आ रही हैं। आखिर छात्राओं की सुरक्षा और सुविधा की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों और आश्रम प्रबंधन की है, उनकी निगरानी में ऐसी स्थिति कैसे बनी?
सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि यदि आश्रम में पानी की व्यवस्था ठीक नहीं है, तो अब तक जिम्मेदार अधिकारियों ने इसका संज्ञान क्यों नहीं लिया? फिलहाल वीडियो सामने आने के बाद प्रबंधन और संबंधित विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं। जरूरत है कि पूरे मामले की जांच हो और यह सुनिश्चित किया जाए कि आश्रम में रहने वाली बच्चियों को पढ़ाई और सुरक्षित वातावरण मिले, न कि पानी की बाल्टियां उठाने की मजबूरी











