महतारी वंदन योजना और स्व-सहायता समूह से सशक्त बनी गंगा बाई कुर्रे

राज्य शासन की योजनाओं के समन्वित प्रयासो से ग्रामीण महिला सशक्तिकरण को मिली गति
जिला संवाददाता डॉ. राम कुमार मनहर जिला शक्ति
सक्ती, 13 अप्रैल 2026 // छत्तीसगढ़ शासन की महतारी वंदन योजना और स्व-सहायता समूहों की पहल ने ग्राम लवसरा की एक साधारण गृहणी को आत्मनिर्भरता की नई पहचान दी है। यह कहानी है श्रीमती गंगा बाई कुर्रे की, जिन्होंने संघर्षों के बीच उम्मीद की एक नई राह बनाई। कुछ समय पहले तक गंगा बाई का जीवन एक आम ग्रामीण महिला की तरह था, सीमित संसाधन, घर की जिम्मेदारियां और भविष्य को लेकर अनिश्चितता। घर की आर्थिक स्थिति कमजोर थी, बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा के खर्च पूरे करना भी चुनौती बन जाता था। कई बार उन्हें अपने छोटे-छोटे सपनों को भी दबाना पड़ता था। लेकिन हालात तब बदले, जब वे “जय माँ दुर्गा स्व-सहायता समूह” से जुड़ीं। शुरुआत में झिझक थी, आत्मविश्वास की कमी भी थी, लेकिन समूह की अन्य महिलाओं के साथ मिलकर उन्होंने धीरे-धीरे काम सीखना शुरू किया। आज वे फिनाइल और अन्य घरेलू उत्पाद बनाकर न केवल आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि हर महीने नियमित आय भी अर्जित कर रही हैं। इसी के साथ महतारी वंदन योजना के तहत मिलने वाली 1000 रुपए की मासिक सहायता उनके लिए संबल बन गई। यह छोटी-सी राशि उनके जीवन में बड़ा बदलाव लेकर आई। अब वे अपने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई पर ध्यान दे पा रही हैं, घर के खर्चों को संभाल रही हैं और सबसे खास थोड़ी-थोड़ी बचत भी कर रही हैं। गंगा बाई की आंखों में अब डर नहीं, बल्कि आत्मविश्वास झलकता है। वे मुस्कुराते हुए बताती हैं कि पहले सोचते थे कि जिंदगी ऐसे ही चलेगी, लेकिन अब लगता है कि हम भी कुछ कर सकते हैं। बच्चों का भविष्य अब पहले से बेहतर दिखाई देता है। आज गंगा बाई सिर्फ अपने परिवार का सहारा नहीं हैं, बल्कि पूरे गांव की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उनकी कहानी यह साबित करती है कि अगर सही अवसर और थोड़ा सा सहयोग मिल जाए, तो हर महिला अपनी किस्मत खुद लिख सकती है। गांव की गलियों में अब गंगा बाई की पहचान सिर्फ एक गृहणी के रूप में नहीं, बल्कि एक सशक्त, आत्मनिर्भर और प्रेरणादायक महिला के रूप में होती है जो अपने संघर्षों से उठकर सफलता की नई मिसाल बन गई हैं।











