
मिसल बंदोबस्त, अधिकार अभिलेख, निस्तार पत्रक और पुराने नक्शे स्कैन व लैमिनेट; दीमक, नमी और आग से सुरक्षित रहेंगे दस्तावेज
राजस्व प्रशासन में पारदर्शिता लाने और पुराने भू-अभिलेखों को सुरक्षित रखने के लिए बम्हनीडीह तहसील में दस्तावेजों के संरक्षण और डिजिटलीकरण का काम शत-प्रतिशत पूरा कर र लिया लिया गया है।
केंद्र सरकार के डिजिटल इंडिया आधुनिकीकरण भू-अभिलेख कार्यक्रम के तहत तहसील परिसर में मॉडर्न रिकॉर्ड रूम भी तैयार किया गया है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में
मिले बजट से रिकॉर्ड रूम में दस्तावेजों को दीमक, नमी, धूल और आग से सुरक्षित रखने के इंतजाम किए गए हैं। यहां मोबाइल कॉम्पैक्टर, अलमारियां और टेबल-कुर्सियां लगाई गई हैं। आगंतुकों और पक्षकारों के बैठने के लिए वेटिंग चेयर की व्यवस्था भी की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में योजना के तहत कोई आवंटन नहीं मिला, क्योंकि स्वीकृत बुनियादी ढांचे और डिजिटलीकरण का काम पहले ही पूरा हो चुका था।
ये महत्वपूर्ण अभिलेख किए गए सुरक्षित
मिसल बंदोबस्त अभिलेखः भूमि के पुराने मालिकाना हक और बंदोबस्त से जुड़े दस्तावेजों की शत-प्रतिशत स्कैनिंग और लैमिनेशन किया गया है।
अधिकार अभिलेख व निस्तार पत्रकः ग्रामीणों और किसानों के भू-स्वामित्व अधिकारों और गांवों की निस्तारी भूमि से जुड़े दस्तावेजों को सुरक्षित किया गया है। ऐतिहासिक नवशेः जमीन की सीमा से जुड़े पुराने भू-मानचित्र और नक्शों की हाई-रिजॉल्यूशन स्कैनिंग कर लैमिनेशन किया गया है।
पुराने खसरेः दशकों पुराने खसरा खातों और रकबा विवरणों को डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज कर सुरक्षित रखा गया है।
भू-अभिलेखों में छेड़छाड़ का खतरा घटेगा, आसानी से मिलेंगी प्रतियां
दस्तावेजों के डिजिटल होने और मूल प्रतियों के लैमिनेशन से पुराने भू-अभिलेखों को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी। रिकॉर्ड में छेड़छाड़ या पन्नों के खराब होने का खतरा भी कम होगा। किसानों को राजस्व प्रकरणों, नामांतरण, बंटवारा, फौती और बैंक ऋण के लिए मिसल बंदोबस्त व पुराने खसरों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने में आसानी होगी। लैमिनेशन से पुराने और कमजोर कागजों को नमी व सीलन से बचाकर लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकेगा।












