संवाददाता
श्रीमती सुनीता महंत
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बचपन से पढ़ाई के प्रति लगाव, आर्थिक अभाव की वजह से दफन हो गया, और फिर बाली उमर दस साल में विवाह के बंधन में बंध जाने से मेरे इच्छाएं मर चुकी थी पर समाज में कुछ कर गुजरने की दृढ़ इच्छा शक्ति व आत्मनिर्भरता के भाव ने मुझे पद्मश्री के राष्ट्रीय सम्मान तक पहुंचाया जो आज सभी
महिलाओं को आत्म निर्भर बनने हेतु प्रेरित करने के भाव से आप बीच खड़ी हूं, यह बात नारी सशक्तिकरण की प्रतिमूर्ति पद्मश्री फुलवासन बाई ने नगर में अल्प प्रवास के दरम्यान आज उच्च न्यायालय के अधिवक्ता चितरंजय पटेल के ऑफिसर्स कॉलोनी अवस्थित निवास में मीडिया के साथियों के सवालों के जवाब में कहते हुए नारीशक्तियों से आत्म निर्भर बनने के लिए आग्रह किया।
इस अवसर फुलवासन ने बड़े ही मार्मिक व भावुक अंदाज में महिलाओं से समाज के डर व संकोच से परे अपने कर्मों के बल पर आगे बढ़ने का आग्रह किया। इस अवसर पर राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं सामाजिक न्याय आयोग लीगल सेल के प्रदेश अध्यक्ष व उच्च न्यायालय के अधिवक्ता चितरंजय पटेल ने फुलवासन दीदी को नारी सशक्तिकरण की साक्षात प्रतिमूर्ति बताते हुए नरीशक्तियों से उनके आदर्शों को आत्मसात कर सफल जीवन की ओर अग्रसर होने का आग्रह किया। इन पलों में अधिवक्ता निवास में जनपद अध्यक्ष राजेश कुमार राठौर, युवा नेता चोलेश्वर चंद्राकर, सुशील अग्रवाल, उदय मधुकर व मीडिया के साथियों के साथ परिजनों की गरिमामय उपस्थिति रही।












