
तिल्दा-नेवरा क्षेत्र और उसके आसपास के गांवों के इलाकों में इन दिनों लाल ईंटों का अवैध कारोबार तेजी से फैलता नजर आ रहा है। मुख्य सड़कों के किनारे खुलेआम संचालित हो रहे ईंट भट्ठों के कारण राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सड़क किनारे बड़ी मात्रा में राखड़ एकत्रित कर रखा जा रहा है, जो हल्की हवा चलते ही उड़कर सड़क पर फैल जाता है और आवागमन करने वाले लोगों के लिए गंभीर समस्या बन जाता है।

इन भट्ठों में ईंट पकाने के लिए मुर्गियों के अपशिष्ट का उपयोग किए जाने की बात भी सामने आ रही है, जिससे उठने वाली तेज दुर्गंध के कारण वहां से गुजरना तक मुश्किल हो गया है। भट्ठों से निकलने वाला धुआं और राख वातावरण को लगातार प्रदूषित कर रहे हैं। इसके चलते राहगीरों को सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, विशेषकर गर्मी के दिनों में हालात और भी बदतर हो जाते हैं।

जानकारी के अनुसार, कुम्हार समाज को मिली पारंपरिक छूट का कुछ लोग दुरुपयोग कर रहे हैं। नियमों के तहत कुम्हार जाति के लोगों को अपने निजी उपयोग के लिए सीमित संख्या में ईंटें बनाने की अनुमति होती है, साथ ही वे दीया, मिट्टी के बर्तन जैसे पारंपरिक उत्पाद तैयार कर सकते हैं। लेकिन वर्तमान में इस छूट की आड़ में बड़े पैमाने पर लाल ईंटों का उत्पादन कर उन्हें व्यावसायिक रूप से बेचा जा रहा है, जो पूरी तरह नियमों के विपरीत है।

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि खनिज, राजस्व और पर्यावरण विभाग को इस पूरे मामले की जानकारी होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इससे प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठ रहे हैं और अवैध कारोबार करने वालों के हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
राहगीरों ने व ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस अवैध कारोबार पर तत्काल रोक लगाई जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित हो सके।











